शकील बदायुनी की गजलें
शकील बदायूनी की गजलों में उनकी महारत और शानदार अंदाज नजर आता है। उनकी गजलें गहरी भावनाओं को व्यक्त करती हैं और प्रेम, विरह, आशिकी के विषयों पर बात करती हैं। यहां कुछ प्रमुख गजलें हैं
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शकील बदायूंनी
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1. अपनी धुन में रहता हूँ
अपनी धुन में रहता हूँ, मैं भी तेरे जैसा हूँ
जिसको देख के जी लूँ मैं, तू वो हसीं चेहरा है।
रात हो या दिन हर घड़ी तेरा ही तेरा पहरा है।
2. मोहब्बत की बस्ती
मोहब्बत की बस्ती का क्या अजब नजारा है।
जो दर्द-ए-दिल में बसा है, वही असल हमारा है।
तुम्हारी आंखों का जादू, तुम्हारी हंसी का गारा है।
3. वो आगाज-ए-मोहब्बत
वो आगाज-ए-मोहब्बत का अंजाम हो गया।
दिल ही में रह गई बात, जुबां तक ना हो सका।
तेरी आंखों से छलकता रहा, गम और हम न समझ सके।
4. तन्हाई में बैठा
तन्हाई में बैठा हूँ, तुझे मैं याद कर रहा हूँ।
तेरी तस्वीर आँखों में, जमीं में उतार रहा हूँ।
जो गुज़र गए, वो दिन कहाँ अब लौटकर आते हैं।
5. जरा सी बात पर
जरा सी बात पर, तूने हमसे दूरी बना ली।
क्या ये मोहब्बत थी, जो तेरे दिल से मिटा ली।
तेरे बिना, हर दिन ऐसा लगता है जैसे।
6. दिल की हर धड़कन
दिल की हर धड़कन में, तेरा नाम लिए फिरता हूँ।
तू जहाँ भी रहे, तुझे अपना मान लिए फिरता हूँ।
जो भी बात कहूँ, वो तेरे दिल को भा जाए।
7. सागर की गहराई
सागर की गहराई में, तेरी मोहब्बत का जलवा।
तेरे बिना इस दिल का, कोई क्या है हालवा।
तेरी आँखों का ये जादू, मुझे पल-पल याद आए।
8. तेरे बिना ये दिल
तेरे बिना ये दिल, तन्हा-तन्हा सा लगता है।
हर शाम तेरे बिना, धुंधली-धुंधली सी लगती है।
जो पल तेरे साथ बिता, वो यादें बन गईं।
9. इश्क़ की गहराई
इश्क़ की गहराई में, हमने पाया तेरा नाम।
तेरे बिना ये जिंदगी, एक अधूरी सी शाम।
जो पल तेरे साथ गुज़रे, वो अब यादों में बदल गए।
10. मोहब्बत की राहों में
मोहब्बत की राहों में, हमने तुझे हर पल चाहा।
तेरे बिना ये दिल, हर पल उदास और तनहा।
तेरे बिना हर ख्वाब, जैसे बेमकसद सा लगता है।
"ऐ दिल, किसी की याद में है रोता"
ऐ दिल, किसी की याद में है रोता,
कहो दुनियावालों को, कितना रोता है।
दर्द मंद हुस्न वालों का, अच्छा नहीं कहता,
शहर-ए-ज़ेबां में नक्श-ए-पाया को बचा कर चला। - शकील बदायूंनी
"बात करते हैं नज़रों से बेख़ुदी की जुस्तुजू"
बात करते हैं नज़रों से बेख़ुदी की जुस्तुजू,
दिल की रोशनी ग़ज़लों में है, दुनियावालों में नहीं।
कोई तो है, जो बहुत दर्द से लाभ उठाएगा,
जो बात करते हैं दिल के साथ दिल में बैठे हैं।
- शकील बदायूंनी
"अब है सदा के लिए इक ख्वाब मुझे गुज़र जाने दे"
अब है सदा के लिए इक ख्वाब मुझे गुज़र जाने दे,नज़र से नज़रे, हाल-ए-दिल, आवाज़ से आवाज़ बदल जाने दे।
है नीराज का मिज़ाज, हमनें तो देखा था,
नक्श-ए-पाया जो तुम्हारी दूरियाँ हैं, जीने की अदा हैं।
- शकील बदायूंनी
"तेरे बिना भी ये दिल, किसी का नहीं है"
तेरे बिना भी ये दिल, किसी का नहीं है,
मोहब्बत में ये दिल अब किसी का नहीं है।
तेरी यादों में ये दिल तड़पता है हर पल,
तेरे बिना भी ये दिल किसी का नहीं है।
"दिल की आवाज़ में जो बात कहूं, तुझसे कहूं"
दिल की आवाज़ में जो बात कहूं, तुझसे कहूं,
हर एक ख्वाब में जो बात कहूं, तुझसे कहूं।
तेरी चाहत में जो दिल तड़पता है हर पल,
उस दर्द-ए-दिल की हर बात कहूं, तुझसे कहूं।
"तेरे बिना भी ये दिल, एक अधूरा सा ख्वाब है"
तेरे बिना भी ये दिल, एक अधूरा सा ख्वाब है,
तेरी मोहब्बत में ये दिल, एक पूरा सा ख्वाब है।
तेरे बिना भी ये दिल, एक दर्द सा ख्वाब है,
तेरी यादों में ये दिल, एक सच्चा सा ख्वाब है।
"तेरी आँखों में जो देखूं, तो एक ख्वाब सा लगे"
तेरी आँखों में जो देखूं, तो एक ख्वाब सा लगे,
तेरी बातों में जो सुनूं, तो एक किताब सा लगे।
तेरी मोहब्बत में जो रहूं, तो एक जहाँ सा लगे,
तेरे बिना भी ये दिल, एक सहरा सा लगे।
"तेरे बिना भी ये दिल, एक वीराना सा लगे"
तेरे बिना भी ये दिल, एक वीराना सा लगे,
तेरी यादों में ये दिल, एक बहाना सा लगे।
तेरी मोहब्बत में जो दिल तड़पता है हर पल,
तेरे बिना भी ये दिल, एक अफसाना सा लगे।
"उम्र भर का साथ देने का वादा किया था"
उम्र भर का साथ देने का वादा किया था,
अब वो बातों को भूलने का इरादा किया था।
दर्द-ए-दिल ने एक नई राह दिखाई हमें,
उन्होंने एक हंसते हुए शाम का वादा किया था।
"तेरी चाहत में दिल कभी फना नहीं होता"
तेरी चाहत में दिल कभी फना नहीं होता,
हर लम्हा तेरा एहसास जुदा नहीं होता।
तेरे बिना भी ये दिल वीराना सा लगता है,
तेरी यादों में दिल कभी तन्हा नहीं होता।
"दिल में हर लम्हा हर इक बात याद रखते हैं"
दिल में हर लम्हा हर इक बात याद रखते हैं,
उन से बिछड़ कर उनकी हर बात याद रखते हैं।
चाहतों की हमें हर बार सजा मिलती है,
फिर भी उम्मीदों के हर जज़्बात याद रखते हैं।
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