शेष शय्या पर भगवान विष्णु के नाभि कमल से ब्रह्मा जी का प्रादुर्भाव | Brahma ji emerged from the navel lotus of Lord Vishnu on the remaining bed

शेष शय्या पर भगवान विष्णु के नाभि कमल से ब्रह्मा जी का प्रादुर्भाव, शिव की माया से विमोह और विष्णु द्वारा शिव माहात्म्य का कथन

ऋषियों का प्रश्न:

ऋषियों ने सूत जी से प्रश्न किया:

"हे सूत जी! प्राचीन काल में भगवान ब्रह्मा नाभिकमल से कैसे प्रकट हुए? विष्णु जी ने ब्रह्मा जी के साथ भगवान शिव का दर्शन कैसे किया? कृपया इसका विस्तृत वर्णन करें।"

सृष्टि का प्रारंभ

सूत जी बोले:

"प्रलय के समय केवल जल और घना अंधकार था। उस प्रलय के मध्य में शंख, चक्र और गदा धारण किए हुए, नील मेघ के समान शरीर वाले, कमल-नेत्रों वाले, मुकुट और आठ भुजाओं से सुशोभित भगवान विष्णु, हजार फणों वाले शेषनाग पर शयन कर रहे थे।"

नाभि कमल से ब्रह्मा जी का प्रकट होना:
भगवान विष्णु ने अपनी योगमाया से अपनी नाभि से एक दिव्य कमल उत्पन्न किया। यह कमल शतयोजन विस्तीर्ण था और सूर्य के समान प्रखर तेजस्वी था। इस कमल पर हिरण्यगर्भ, चार मुख वाले ब्रह्मा जी प्रकट हुए। वे विशाल नेत्रों और अद्वितीय सौंदर्य से युक्त थे। ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु को देखा और उनके तेजस्वरूप से विस्मित होकर पूछा:
"हे प्रभु! आप कौन हैं? इस जल के मध्य शयन करते हुए आप किस उद्देश्य से यहाँ उपस्थित हैं?"

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लिंग पुराण : भगवान्‌ विष्णु के नाभि कमल से ब्रह्मा जी का प्रादुर्भाव, भगवान्‌ शिव की माया |

भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी का संवाद

भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी को बताया:
"मैं प्रत्येक कल्प में सृष्टि के आरंभ से पहले इस स्थान पर शयन करता हूँ। मैं ही सभी लोकों और भुवनों का आधार हूँ।"

इसके बाद विष्णु जी ने ब्रह्मा जी से पूछा:
"हे देवश्रेष्ठ! आप कौन हैं? आप कहाँ से आए हैं, और आपका निवास कहाँ है?"

ब्रह्मा जी शिव की माया से मोहित होकर बोले:
"मैं ही सृष्टिकर्ता हूँ। मैं ही प्रजापति और जगत का रचयिता हूँ।"

शिव की माया और विष्णु का प्रवेश

भगवान विष्णु, ब्रह्मा जी की इस बात से विस्मित होकर उनके मुख में प्रवेश कर गए। उन्होंने ब्रह्मा जी के उदर में अठारह द्वीप, सात लोक, पर्वत, समुद्र और विविध स्थावर-जंगम पदार्थों को देखा। हजारों वर्षों तक भ्रमण करने के बाद भी विष्णु जी को ब्रह्मा जी के उदर का अंत नहीं मिला। तब वे बाहर लौट आए और ब्रह्मा जी से कहा:
"हे ब्रह्मा! आपका तेज अनंत है। मैंने आपके उदर का अंत नहीं देखा।"

ब्रह्मा का विष्णु के उदर में प्रवेश

अब विष्णु जी ने ब्रह्मा जी को अपने उदर में प्रवेश करने के लिए कहा। ब्रह्मा जी ने विष्णु जी के उदर में प्रवेश किया और वहाँ पर अनेक दिव्य लोक, पर्वत, और समुद्र देखे। उन्होंने भी विष्णु जी के उदर का अंत नहीं पाया और कमल नाल के माध्यम से बाहर लौट आए।

निष्कर्ष

भगवान विष्णु और ब्रह्मा दोनों ने इस घटना से समझा कि वे भगवान शिव की माया से मोहित हो रहे हैं। इसके बाद विष्णु जी ने ब्रह्मा जी के समक्ष भगवान शिव का माहात्म्य वर्णन किया और उनकी स्तुति की। यह प्रकरण इस तथ्य को उजागर करता है कि सभी देवताओं के कार्य और शक्तियाँ भगवान शिव की कृपा और माया से संचालित हैं।

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