सृष्टि के लिए तप और रुद्रों की उत्पत्ति का वर्णन | Penance for creation and description of the origin of Rudras

महादेव जी द्वारा विष्णु और ब्रह्म को वरदान, सृष्टि के लिए तप और रुद्रों की उत्पत्ति का वर्णन

शिव का विष्णु और ब्रह्मा को वरदान

सूतजी ने ऋषियों से कहा: जब भगवान विष्णु और ब्रह्माजी अत्यंत विनम्र भाव से भगवान शिव की स्तुति कर रहे थे, तो भगवान शिव का मुख प्रसन्नता से खिल उठा। उनके नेत्रों में करुणा और प्रेम का भाव प्रकट हुआ। महादेव ने दोनों की स्तुति सुनकर क्रीड़ावश पूछा:

"हे महात्माओं! आप दोनों कौन हैं और इस महासागर में क्यों स्थित हैं?"

तब ब्रह्मा और विष्णु ने उत्तर दिया:
"हे प्रभु! हम आपकी ही इच्छा से उत्पन्न हुए हैं। आप ही हमें इस सृष्टि में लाए हैं।"

महादेव ने प्रसन्न होकर कहा:
"हे हिरण्यगर्भ (ब्रह्मा) और कृष्ण (विष्णु), मैं आपकी भक्ति से संतुष्ट हूं। बताइए, मैं आपको कौन-सा वरदान दूं?"

भगवान विष्णु ने निवेदन किया:

"हे प्रभु! मुझे आपके प्रति अडिग भक्ति का वरदान दें।"

महादेव ने उन्हें अपना आशीर्वाद दिया और कहा:

"तुम मेरे हृदय के प्रिय हो। मेरी भक्ति और कृपा सदैव तुम्हारे साथ रहेगी।"

इसके बाद महादेव ने ब्रह्माजी को आशीर्वाद देते हुए कहा:

"तुम इस सृष्टि के रचयिता हो। तुममें सृष्टि का अधिष्ठान है। तुम्हें ज्ञान और शक्ति प्रदान करता हूं।"

शिवजी अंतर्ध्यान हो गए, और ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना के लिए तपस्या प्रारंभ की।

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लिंग पुराण : महादेव जी द्वारा विष्णु और ब्रह्मको वरदान, सर्पों एवं रुद्रों की सृष्टि |

सर्पों और रुद्रों की उत्पत्ति

ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना के लिए कठोर तप किया, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। इस कारण वे अत्यंत दुखी और क्रोधित हो गए। उनके नेत्रों से अश्रु बहने लगे। इन अश्रुओं से विषैले सर्पों का जन्म हुआ। सर्पों को देखकर ब्रह्माजी को ग्लानि हुई, और वे बोले:

"मेरी तपस्या का यह फल है कि विनाशकारी प्रजाओं का जन्म हो रहा है।"

ब्रह्माजी के क्रोध और ग्लानि से उनकी चेतना चली गई। उनके शरीर से ग्यारह रुद्र प्रकट हुए, जो अत्यंत शक्तिशाली और क्रोध से भरे थे। उनके रुदन के कारण उन्हें 'रुद्र' कहा गया।

महादेव ने पुनः प्रकट होकर ब्रह्माजी को उनके प्राण लौटाए और कहा:
"हे ब्रह्मा! तुम्हें तपस्या का फल मिलेगा। सृष्टि की रचना करो और संसार में धर्म की स्थापना करो।"
ब्रह्माजी ने महादेव की स्तुति की और सृष्टि की रचना प्रारंभ की।


रुद्रों का महत्व
ग्यारह रुद्र जीवों के प्राणस्वरूप माने गए। वे सभी सृष्टि में उपस्थित प्राणियों के जीवन का आधार बने। महादेव ने ब्रह्माजी को ज्ञान और तपस्या की शक्ति प्रदान की, जिससे वे सृष्टि के निर्माण में सक्षम हो सके।


शिव की महिमा
महादेव ने सृष्टि के आरंभ में अपनी करुणा और कृपा से ब्रह्मा और विष्णु को वरदान दिया। उन्होंने सर्पों और रुद्रों की उत्पत्ति कर संसार में संतुलन स्थापित किया। शिवजी की कृपा से ही ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना का कार्य पूर्ण किया।


पाठ का सारांश

  • भगवान विष्णु और ब्रह्माजी की स्तुति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें वरदान दिया।
  • ब्रह्माजी के अश्रुओं से सर्पों की उत्पत्ति हुई।
  • ग्यारह रुद्र महादेव की शक्ति से प्रकट हुए।
  • शिवजी ने सृष्टि निर्माण के लिए ब्रह्माजी को ज्ञान और शक्ति प्रदान की।

लिंग पुराण का यह प्रसंग महादेव की करुणा, उनकी सृष्टि की रचना में भूमिका और भक्तों के प्रति उनके स्नेह को दर्शाता है।

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