ब्रह्मा तथा विष्णु द्वारा भगवान् महेश्वर की स्तुति एवं उसका माहात्म्य | Praise of Lord Maheshwar and his greatness by Brahma and Vishnu
ब्रह्मा तथा विष्णु द्वारा भगवान् महेश्वर की स्तुति एवं उसका माहात्म्य
सूतजी का वर्णन
सूतजी ने कहा: भगवान विष्णु ने ब्रह्मा को आगे करके, अतीत, भविष्य और वर्तमान के कल्पों से संबंधित महादेव जी के वेद प्रतिपादित नामों का पाठ किया।
भगवान विष्णु की स्तुति
महेश्वर की स्तुति का आरंभ:
स्तुति के प्रमुख श्लोक:
- नाम और स्वरूप की महिमा"नमस्ते भगवते अनन्त तेजस्वी क्षेत्राधिपति, बीजस्वरूप त्रिशूलधारी महेश्वर को नमस्कार।""सुमेन्द्राय, आर्यमेंद्राय, रूक्षरेता को नमस्कार।"
- समग्र विश्व के स्वामी को नमन"वेद, स्मृति, कर्म, दान, योग, सांख्य के प्रभु, आपको नमस्कार है।""ऋतुओं, ग्रहों, महासागरों, पर्वतों, नदियों, वृक्षों, और औषधियों के स्वामी को नमस्कार।"
- काल के अधिपति"क्षणों, लवों, मासों, अर्धमासों और वर्ष के स्वामी को नमस्कार।""सृष्टि, प्रलय, मन्वंतर, तथा पुराण के अधिपति, आपको नमस्कार।"
- विविध गुणों का स्तवन"भूत, भविष्य और वर्तमान के अधिपति।बंधन और मोक्ष के दाता।स्थूल और सूक्ष्म के रूप में स्थित।"
- प्रकृति और तत्वों के स्वामी"अग्नि, जल, वायु, आकाश और पृथ्वी के तत्वों को संचालित करने वाले, आपको नमन।"
click to raed 👇👉 लिंग पुराण : ब्रह्मा तथा विष्णु द्वारा की गयी भगवान् महेश्वरकी स्तुति एवं उसका माहात्म्य |
महेश्वर का स्वरूप और गुण
भगवान महेश्वर के अनेक नाम और स्वरूप सृष्टि के हर आयाम को दर्शाते हैं:
- पुरुषार्थ: धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष के अधिपति।
- प्रकृति के रूप: पर्वतों, नदियों, वृक्षों, औषधियों के पोषक।
- आध्यात्मिक गुरु: योग, सांख्य, और वेदों के प्रवर्तक।
- कर्म और ज्ञान के साधक: यज्ञ, दान, तपस्या और साधना के प्रेरक।
माहात्म्य और श्रद्धा
भगवान महेश्वर की स्तुति करने से:
- पापों का नाश होता है।
- धन, स्वास्थ्य और सुख की प्राप्ति होती है।
- मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
यह स्तुति भगवान शिव के विराट स्वरूप, उनकी कृपा और उनके सृष्टि संचालन में भूमिका का विस्तारपूर्वक वर्णन करती है।
निष्कर्ष
इस अध्याय में विष्णुजी ने स्वयं ब्रह्मा को आगे कर भगवान महेश्वर की स्तुति की। यह दर्शाता है कि भगवान शिव संपूर्ण सृष्टि के आधार हैं। उनकी महिमा अनंत है और उनकी स्तुति करने से हर प्रकार की सिद्धि प्राप्त होती है।
पाठक इस स्तुति का पाठ कर अपनी भक्ति को प्रगाढ़ कर सकते हैं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें